रात
गुमसुम पड़ी-सी सांस लेती रात
जागती-सी,सोचती-सी,अधखुली-सी रात
मातखाई,कुनमुनाती,छटपटाती रात
तेरे तीरे-नीमकश-सी ख़लिश देती रात
यह अंधेरा घन अंधेरा,धुप अंधेरी रात
डबडबाती, सुबकती-सी मात खाई रात
जुल्फ के साये में ठिठकी, तमन्ना-सी रात
तेरी पेशानी पे चमकी, इक अदा-सी रात
दिल में मेरे चुप पड़ी थी, अब तलक जो बात
जुबां पर आकर अटकती अटकती-सी बात
दस वर्ष पहले
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